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यूपी-बिहार से दबोचे गए तीन खूंखार शूटर
कोलकाता। तत्कालिन विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या के मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। विशेष जांच दल ने अंतरराज्यीय छापेमारी करते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार से तीन पेशेवर शूटरों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान मयंकराज मिश्रा, विक्की मौर्य और राज सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इन शूटर्स ने चंद्रनाथ की हत्या के लिए हफ्तों तक रेकी की थी और बेहद शातिराना तरीके से वारदात को अंजाम दिया था। गिरफ्तार तीनों आरोपियों को सोमवार को बारासात कोर्ट में पेश किया गया जहाँ से अदालत ने तीनों को 13 दिनों के पुलिस हिरासत में भेज दिया हैं।
बक्सर और बलिया में चला ऑपरेशन क्लीन
एसआईटी और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने तकनीकी सर्विलांस के आधार पर बिहार के बक्सर और उत्तर प्रदेश के बलिया में जाल बिछाया था। मयंकराज और विक्की को बक्सर से हिरासत में लिया गया, जबकि राज सिंह को बलिया से दबोचा गया। सोमवार को तीनों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच कोलकाता लाया गया, जहां उन्हें अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी। प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि ये तीनों सुपारी लेकर हत्या करने वाले पेशेवर गिरोह का हिस्सा हैं।
डेढ़ महीने से रची जा रही थी मौत की साजिश
जांचकर्ताओं ने खुलासा किया है कि चंद्रनाथ रथ को रास्ते से हटाने की साजिश कम से कम डेढ़ महीने पहले ही रच ली गई थी। 6 मई की रात मध्यग्राम में जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं था। हमलावरों ने पहले झारखंड नंबर वाली एक कार से चंद्रनाथ की गाड़ी का रास्ता रोका और फिर दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए शूटरों ने दोनों तरफ से अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में चंद्रनाथ की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनके चालक की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।
टोल प्लाजा के डिजिटल सुराग ने बिगाड़ा खेल
अपराधियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कार और दोनों बाइकों पर फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया था, लेकिन एक छोटी सी चूक ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। हत्या में इस्तेमाल की गई कार जब झारखंड से बंगाल आ रही थी, तब बाली टोल प्लाजा पर उसका ऑनलाइन भुगतान किया गया था। इसी डिजिटल ट्रांजेक्शन और सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुलिस गाड़ी के असली मालिक और फिर शूटरों तक पहुंचने में सफल रही।
मास्टरमाइंड की तलाश तेज
हालांकि तीन शूटरों की गिरफ्तारी से पुलिस को बड़ी राहत मिली है, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है। जांच एजेंसियां अब उस मास्टरमाइंड की पहचान करने में जुटी हैं, जिसने इन पेशेवर अपराधियों को सुपारी दी थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि चंद्रनाथ के हालिया विवादों और वित्तीय लेनदेन की फाइलें फिर से खंगाली जा रही हैं। इस गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आने की संभावना है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर प्रदेश के एक कद्दावर नेता के करीबी से जुड़ा है।